भाषा और खतियान आंदोलन से उभरा एक चेहरा अब विधायक बन गया है। इस युवा चेहरे जयराम महतो और उनकी पार्टी जेएलकेएम ने विधानसभा चुनाव में सबको चौंकाया। झारखंड की राजनीति की दिशा बदल दी। जयराम महतो खुद डुमरी से चुनाव जीते, हालांकि बेरमो से चुनाव हार गये। लेकिन उनकी पार्टी ने अप्रत्याशित प्रदर्शन किया। आजसू पार्टी को पूरी तरह क्षतिग्रस्त किया। वहीं एनडीए गठबंधन को एक दर्जन सीटों पर नुकसान झेलना पड़ा। तीन सीटों पर जयराम की पार्टी दूसरे स्थान पर रही। टाइगर जयराम महतो का कहना है कि चुनाव लड़ना व सत्ता सुख हमारा लक्ष्य नहीं था। हम अपने सहपाठियों के साथ अधिकार की मांग को लेकर सड़क पर निकले थे। संघर्ष, बलिदान, व आंदोलन के बल पर यहां तक पहुंचे हैं। विरासत में जो आंदोलन मिला था, आज वह जनता के विश्वास के रूप में दिख रहा है। छात्रों की समस्या, विस्थापन, पलायन, बेरोजगारी व अपनी पार्टी के मुद्दों के साथ खड़ा रहेंगे। राज्य को बेहतर बनाने के लिए पॉलिसी रहेगी तो समर्थन रहेगा, नहीं तो अकेले सदन में मुद्दों पर संघर्ष जारी रखेंगे।
