कोल्हान में सारंडा वन क्षेत्र है। जहां देश आजादी के 76 वर्ष और झारखंड गठन के 24 वर्ष बाद भी मुलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है। कहने को तो जिला में जिला खनिज निधि मद (डीएमएफडी फंड) सांसद और विधायक फंड है। इसके आलावे अन्य विभागों में समाज कल्याण के लिए है जिसमे विकास योजनाएं संचालित हो रही है। किन्तु क्षेत्र में मुलभूत सुविधाओं की समाज की अंतिम व्यक्ति तक विकास योजना और सेवाओं का पहुंच की बात है तो वे इससे कोसो दूर है। यही वजह है कि सारंडा वन क्षेत्र के जंगल, पठारी आदि दुगर्म क्षेत्र में रहने वाले लोग अपने दैनिक जिविका यापन के लिए प्रकृति सम्पदाओं, जलवान, पेड़, पौधे, फल फूल, जड़ी बुटी आदि को अपने जिविका सहारा बनाये हुए है।ग्रामीण क्षेत्र स्थानीय क्षेत्र में रोजगार का घोर अभाव है। क्षेत्र में बंद बड़े छोटे बड़े खदानो ने ग्रामीण क्षेत्र में बेरोजगारों की फौज खड़ी कर रखी है। साथ ही मनरेगा जैसे योजनाएं भी इन क्षेत्रो में सही ढंग से संचालन नही हो पाते है। समय पर मजदुरी भुगतान नही होना, मौसमी खेती पर लोगों का निर्भर रहना, कृषि कार्य के तकनीकी व जल संसाधनो की कमी के कारण बेरोजगारी क्षेत्र में व्याप्त है और युवा युवतियां दुसरे राज्य में रोजी रोटी के जुगाड़ के लिए पलायन को मजबुर है। बतां दे की क्षेत्र की प्रमुख सप्ताहिक बाजार ग्रामीण क्षेत्र की आर्थिक स्थिति को संतुलन बनाये रखने के लिए एक प्रकार से कड़ी का काम करती है पर बाजारों में सही ढंग से उत्पादकों का क्रय विक्रय की उचित व्यवस्था न होना भी एक चुनौति बनी हुई है।
