राज्य में देसी शराब की मांग में गिरावट से उत्पाद विभाग चिंतित है। विभाग ने इस मुद्दे पर गहराई से विचार करने के बाद रणनीति बनाने के लिए बैठकों का आयोजन किया। लंबे मंथन और चिंतन के बाद यह तय किया गया कि देसी शराब की बिक्री बढ़ाने के लिए 300 एमएल शराब अब 55 रुपये में उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही यह सुनिश्चित करने के लिए कि किसी भी दुकान पर देसी शराब की कमी न हो, विभागीय मंत्री ने शराब कंपनियों के मालिकों के साथ बैठक की।
आखिर क्यों घट गई बिक्री?
राज्य में एक बड़ा तबका कंट्री लिकर का सेवन करता है, जिससे राज्य सरकार को राजस्व का फायदा होता है। लेकिन पिछले पांच वर्षों में शराब पीने वालों की संख्या में कमी देखी गई। इस गिरावट के कारणों का पता लगाने के लिए विभाग ने मंथन किया। इसमें पाया गया कि शराब की बढ़ती कीमतें इसकी बिक्री में कमी का मुख्य कारण बनीं।
55 रुपये में मिलेगी 300 एमएल की बोतल
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि कंट्री लिकर की बिक्री अब प्लास्टिक की बोतलों में की जाएगी। 300 एमएल की बोतल 55 रुपये में उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे इसकी मांग बढ़ेगी। अब तक राज्य सरकार 40 रुपये में 180 एमएल शराब सीसे की बोतल में बेच रही थी। विभाग को उम्मीद है कि ज्यादा मात्रा में कम कीमत पर शराब मिलने से बिक्री में बढ़ोतरी होगी।
पिछले वर्षों में बिक्री का आंकड़ा
साल 2019-20 में 7,35,715 पेटी शराब की बिक्री हुई थी, जो 2020-21 में 25,65,850 पेटी तक पहुंच गई। हालांकि, इसके बाद बिक्री में गिरावट शुरू हो गई। 2022-23 में यह घटकर 6,95,306 पेटी और 2023-24 में 3,24,011 पेटी पर सिमट गई। इस गिरावट के कारण राज्य को राजस्व में बड़ा नुकसान हुआ। अब सरकार ने फिर से बिक्री बढ़ाने की योजना बनाई है।
मंत्री ने कहा नहीं होगी कमी
गुरुवार को रांची के कांके रोड स्थित उत्पाद विभाग के कार्यालय में एक बैठक हुई। बैठक में विभागीय मंत्री ने देसी शराब कंपनियों के मालिकों से उनकी समस्याओं को सुना। मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि राज्य में आठ देसी शराब उत्पादक कंपनियां हैं। यदि इनसे पूर्ति संभव नहीं हुई, तो अन्य राज्यों से शराब मंगाई जाएगी। मंत्री ने कहा कि इन फैक्ट्रियों से उत्पादन ठप होने के कारण राज्य को राजस्व का नुकसान हुआ। उन्होंने समस्याओं का समाधान निकालने और मॉडर्न देसी शराब की दुकानें खोलने का वादा किया, जिससे उत्पादन और राजस्व दोनों बढ़ सकें।
